Aacharya Shri 108 Vimal Sagar Ji Pujan M Shail Jain MP3 Download

Aacharya Shri 108 Vimal Sagar Ji Pujan

124 plays · 15:10 · 2024 · Hindi

About this song

LanguageHindi
Released2024-01-29 (2 years ago)
Lyrics
"निमित्त ज्ञानी सबके स्वामी, जन-जन को सिद्धि देते हैं। साधक मुक्तिपथ के गुरूवर, आराधक सुख लेते हैं। जिनशासन के मार्ग प्रभावक, तन-मन-धन दुखः हरते हैं। विमल सिन्धु के चरण कमल में, कोटि- कोटि हम नमते हैं।। - दोहा - हृदय विराजो आन के, आहृानन त्रय बार। तव गुण कीर्तन गान से, मिटे कोटि संताप।। ॐ हृूं आचार्यश्री विमलसागर स्वामिन्! अत्र अवतर अवतर संवौषट् आहृानन्। ॐ हृूं आचार्यश्री विमलसागर स्वामिन्! अत्र तिष्ठ ठः ठः स्थापनम्। ॐ हृूं आचार्यश्री विमलसागर स्वामिन्! अत्र मम सन्निहितो भव भव वषट् सन्निधिकरणम्। ( अष्टक ) उज्ज्वल जल हम लेकर आये, समता नीर भराई। जन्म-जरा-मृत्यु नाश कराकर, आठों कर्म नसाई।। परमपूज्य ‘सन्मार्ग दिवाकर‘ विमल सिन्धु के गुण गावें। निज निधि ज्ञान सुधारस पाकर, भव-वन में न भटकावें।। ॐ हृूं आचार्यश्री विमलसागर यतिचरणेभ्योः जलं निर्वपामीति स्वाहा। मलयागिरि का चन्दन लेकर, गुरूवर चरण चढाई। गुरू चरणन के ही प्रसाद से, भव आताप नसाई।। ‘करूणानिधि‘ आचार्यरत्न श्री, विमल सिन्धु के गुण गावें। निज निधि ज्ञान सुधारस पाकर, भव-वन में न भटकावें।। ॐ हृूं आचार्यश्री विमलसागर यतिचरणेभ्योः चंदनं निर्वपामीति स्वाहा। क्रोध कषाय की ज्वालाओं ने, खण्डित जीवन कर डाला। अक्षत पुष्प अखण्ड चढावें, मिटे कर्म-मल सब काला।। ‘निमित्तज्ञान शिरोमणि‘ गुरूवर, विमल सिन्धु के गुण गावें। निज निधि ज्ञान सुधारस पाकर, भव-वन में न भटकावें।। ॐ हृूं आचार्यश्री विमलसागर यतिचरणेभ्योः अक्षतं निर्वपामीति स्वाहा। कमल पुष्प की माल चढाकर, काम नशाने आये हैं। बाल-ब्रह्मचारी गुरूवर हम, भक्ति सुमन ले आये हैं।। ‘चक्रवर्ती-चारित्र निधि‘ श्री विमल सिन्धु के गुण गावें। निज निधि ज्ञान सुधारस पाकर, भव-वन में न भटकावें।। ॐ हृूं आचार्यश्री विमलसागर यतिचरणेभ्यो पुष्पं निर्वपामीति स्वाहा। मैसूरपाक, जलेबी, घेवर, भर-भर थाल सजाये हैं। क्षुधा वेदना से अकुलाये, अर्पण करने आये हैं।। ‘वात्सल्य रत्नाकर‘ गुरूवर श्री, विमल सिन्धु के गुण गावें। निज निधि ज्ञान सुधारस पाकर, भव-वन में न भटकावें।। ॐ हृूं आचार्यश्री विमलसागर यतिचरणेभ्यो नैवेद्यं निर्वपामीति स्वाहा। मोह तिमिर से भटकाये प्रभु, सतपथ अब तक न पाया। रत्नमयी दीपक लेकर हम, ज्ञान ज्योति पाने आये।। ‘तीर्थोद्धारक-चूणामणि‘ श्री विमल सिन्धु के गुण गावें। निज निधि ज्ञान सुधारस पाकर, भव-वन में न भटकावें।। ॐ हृूं आचार्यश्री विमलसागर यतिचरणेभ्यो दीपं निर्वपामीति स्वाहा। कर्म आठ से पीड़ित हैं प्रभू, अब तक चैन नही पाया। गुग्गल धूप दशांगी लेकर, कर्म नशाने हम आयें।। ‘अतिशय योगी‘ बालब्रह्म यति, विमल सिन्धु के गुण गावें। निज निधि ज्ञान सुधारस पाकर, भव-वन में न भटकावें।। ॐ हृूं आचार्यश्री विमलसागर यतिचरणेभ्यो धूपं निर्वपामीति स्वाहा। श्रीफल आम नारंगी केला, थाल सजाकर आये हैं। मोक्ष महाफल पाने की गुरू, आशा लेकर आये हैं।। ‘विद्या -खण्ड-धुरन्धर‘ गुरूवर, विमल सिन्धु के गुण गावें। निज निधि ज्ञान सुधारस पाकर, भव-वन में न भटकावें।। ॐ हृूं आचार्यश्री विमलसागर यतिचरणेभ्यो फलं निर्वपामीति स्वाहा। आठ द्रव्य का थाल चढाकर, आठों कर्म खपावें। अष्ट गुणों की सिद्धि पाकर, सिद्ध लोक बस जावें।। परम तपस्वी त्यागमूर्ति श्री, विमल सिन्धु के गुण गावें। निज निधि ज्ञान सुधारस पाकर, भव-वन में न भटकावें।। ॐ हृूं आचार्यश्री विमलसागर यतिचरणेभ्यो अर्घ्यं निर्वपामीति स्वाहा। जयमाला दोहा सरल स्वाभी विमल गुरू, चरणन शीश नवाय। कमल केतकी पुष्प ले, अर्पण करूँ हर्षाय।। जै मुक्तिदूत विमल सिन्धु गुरू हैं हमारे। जै तीन लोक से निराले देव हमारे।। जै जै तपस्वी एक नाथ आप राजते। जै जै भवि-जनों के हृदय आप सासते।। जै वीर महावीरकीर्ति गुरू हैं तुम्हारे। जै मुक्तिदूत विमल गुरूदेव हमारे।। 1।। जै धन्य जन्म भूमि कोसमा के ग्राम की। जै-जै सुधन्य मात कटोरी के लाल की।। जै-जै सुधन्य पिता बिहारी के प्राण की। जै-जै सुधर्म सिन्धु देवराज की।। जै वीर धीर बाल ब्रह्मचारी सितारे। जै मुक्तिदूत विमल सिन्धु देव हमारे।। 2।। जै-जै सुसिद्ध क्षेत्र सोनागिरि के राज की। जै-जै सु यहाँ दीक्षा पाय मुनिराज की।। जै-जै सुध्यान धारते जिनराज की मही जै-जै सु वीर धीर तपस्वी महायशी।। जै-जै सुनिमित्त ज्ञान शिरोमणि हैं हमारे। जै मुक्तिदूत विमल गुरूदेव हमारे।। 3।। ‘टूण्डला‘ नगर था धन्य गुरू आपसे हुआ। आचार्य पद प्रदान कर, सब जग प्रसन्न हुआ।। दे शिक्षा दीक्षा दान भव्य जीव उबारे। हैं योग्य शिष्य विश्व में जो तुम्हारे।। जै भरत सिन्धु सूरी सुशिष्य तुम्हारे। जै मुक्तिदूत विमल सिन्धु देव हमारे।। 4।। जै शरण आपकी लहै तिरते ही जा रहे। जै कर विहार भूमि-भूमि तीर्थ निहारे।। जै करके वन्दना सभी तो तीर्थ उद्धारे। दे भव्य जीव दीक्षा दान तुमने उबारे। जै समवशरण रचना कर भव्य उबारे। जै मुक्तिदूत विमल सिन्धु देव हमारे।। 5।। जै राजग्रही का जो स्वाध्याय भवन भारी है। जै धन्य-धन्य गुरू स्मृति में देन थारी है।। जै नंगा नंग मूर्तियाँ ये शान से खड़ी। जै चैबीसी निर्माण की ये श्रृंखला जुड़ी।। जै श्रुतस्कंध के ये प्रेरक देव हमारे। जै मुक्तिदूत विमल सिन्धु देव हमारे।। 6।। तन दुखी और मन दुखी और धन दुखी आते। नवकार मन्त्र जाप करो सबको बताते।। लख-लख के जाप करते सब पुण्य कमाते। पापों का नाश करके सभी चैन पाते।। जै मन्त्र-यन्त्र-तन्त्र विज्ञ गुरू ये हमारे। जै मुक्तिदूत विमल सिन्धु देव हमारे।। 7।। करते चरण में वन्दना गुरूदेव आपके। हो पार भव समुद्र से आशीष आपके।। नित तीन बार सिर नवाँ में वन्दना करूँ। भर भाव भक्ति से गुरू पद क्षालना करूँ।। नित रोम रोम में बसे गुरूदेव हमारे। जै मुक्तिदूत विमल सिन्धु देव हमारे।। 8।।"
More about this song

The Hindi number Aacharya Shri 108 Vimal Sagar Ji Pujan is sung by M Shail Jain (2024). With 124 plays, it’s a promising new addition to the music landscape.

Running for 15:10, distributed by Vimal Sangeet Records, the track offers premium 320kbps audio.

M Shail Jain is a talented artist in the music industry. Their legacy in Hindi music speaks for itself.

Ankur Jain Ank handles the music, crafting an arrangement that complements the vocals. Notably, Ankur Jain Ank also penned the lyrics, lending the song a rare unity between melody and words.

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Frequently asked questions
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Who sang Aacharya Shri 108 Vimal Sagar Ji Pujan? Song credits

Aacharya Shri 108 Vimal Sagar Ji Pujan is sung by M Shail Jain. Music composed by Ankur Jain Ank. Lyrics written by Ankur Jain Ank. Released on 2024-01-29. Label: Vimal Sangeet Records.

M Shail Jain most popular songs?

M Shail Jain has 8+ songs on Song-Download, including Wo Mere Papa Hain, Tu Muskan Humari Hai, Pariyon Ki Duniyan Se (feat. M Shail Jain), Guruvar Tum Jaisa Koi Nhin (Jain Guru Bhajan), Nanhe Nanhe Kadmo Se Khushiyan Laya Hai. Music by Ankur Jain Ank.

How long is Aacharya Shri 108 Vimal Sagar Ji Pujan? Details

Aacharya Shri 108 Vimal Sagar Ji Pujan is 15:10 long and is a Hindi song. 124 plays. Free MP3 download in multiple qualities on Song-Download.

Is Aacharya Shri 108 Vimal Sagar Ji Pujan free to download?

Yes. Aacharya Shri 108 Vimal Sagar Ji Pujan by M Shail Jain is free to download on Song-Download in 320kbps, 160kbps, and 48kbps. No registration required.

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